यूपी ; कानपुर शहर के चौबे पुलिस कोतवाली के हिस्ट्रीशीटर बदमाश ,विकास दुबे द्धारा करवाया गया पुलिस पर आत्मघाती हमले से, मध्यप्रदेश की पुलिस को भी सबक लेना ही होगा -


मध्यप्रदेश की पुलिस को भी सबक लेना ही होगा-


(चुन्नीलाल परमार) 


बड़नगर /(उज्जैन ) वैसे  अपराधी कोई भी अपनी माँ की कोख से बनकर नहीं आता है, कोई हालातों का मारा अपराधी बन जाता है, तो किसी को राजनीतिक रसूखदारों की पहुंच अपराधी बना देती हैं,तो किसी को पुलिस के तमगे लगाने का शोक ओर उन्नति के सौपानो को पार करने का जुनून अपराधी बना देते हैं, । तमगो के शौकीन कुछ पुलिस अधिकारी ना समंझ ओर बिना पहुंच के गरीब घर के बच्चों पर अनावश्यक अपराध लादकर, उन्हें बढा अपराधी घोषित करने में भी गुरेज नहीं करते हैं, । कभी कभी तो ये ना समंझ ओर हालातों के मारे एनकाउन्टर नाम पर मार दियें जातें हैं, पुलिस की वाह वाही होती हैं, जिनके बच्चे मारे जाते हैं, उनके माता पिता के आंसू आखों में सुख जातें हैं ओर माता का दुध आँचल में ही सुख जाता है ।


🔷 यदि एसा नहीं होता तो दो चार छोटे मोटे अपराध पर ही अपराधी एनकाउन्टर कर दिये जाते हैं,ओर कानपुर के विकास दुबे जैसे 60 अपराधों का आरोपी कैसे बचा रहा पुलिस की संगीनों से !!!?


 


🔷 पुलिस गरीबों पर अपराध पंजीबद्ध करके ओर उनपर अपराध आरोपित करके उन्हें प्रताड़ित करती रहती है, गरीबों को सडको पर मारते हुए जुलूस निकालती रहती हैं, ओर वाह वाही भी लूटती रहती हैं ।


🔷 किन्तु बडे अपराधियों पर हाथ डालने से घबराती रहती हैं, वजह राजनीति या रुपया,,, पुलिस की कमजोर कडी बन जाती हैं । यूपी के कानपुर शहर के हिस्ट्रीशीटर बदमाश, विकास दुबे जैसे अपराधी की मजबूत शक्सियत जो साठ अपराध करने के बाद भी जिंदा रहकर आठ पुलिस यौद्धाओ के प्राण हरण कर गया एव सात जवानों को घायल करके जिंदा बच निकला ऐसी घटनाओं ने पुलिस कार्यवाही को कटघरे में खडा करके रख दिया है ।


🔷 यह सब समाज सरकार राजनीतिक पार्टी एवं पुलिस को आत्म चिंतन करने जैसा प्रसंग हैं । आखिर यूपी के कानपुर शहर के चौबे पुलिस कोतवाली के हिस्ट्रीशीटर बदमाश, विकास दुबे जैसे अपराधी का जनक कौन हैं !!!? प्रश्न गहन गंभीर भले ना हो किन्तु समाज चितंको के लिए चिंता का विषय अवश्य है ।


 🔷 इस घटना से मध्यप्रदेश की पुलिस को भी सबक लेना ही होगा, गरीबों को सताना छोड़कर अमीर घरों के गुंडो बदमाशो ओर राजनीति तले पलने वाले सपोलो को राडर पर रखना ही होगा, अन्यथा ये यूपी के कानपुर शहर के विकास दुबे जैसे अपराधी बनकर पुलिस के ही दुश्मन बन बैठेंगे । वजह पैसा ओर राजनीति पैठ । गरीब अपराधी तो यूँ ही बील में दुबक जायेंगे जब शेर नाचेगा भरे बाजार में पुलिस की छडी से ।


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